ना ऐसी मेरी किस्मत के र्कचीधाम आ सका,
अपने बाबा के चरणों में शीश नवा सका।
तरणी में तेरा नाम लेके चलूँ,
अपनी कश्ती को तू पार लगा सका।
मुझे दर्शन दो बाबा, तेरे चरण में सिर रख सकूँ,
तेरे दर पर जो आया, वो कभी ना लौट सके।
तेरे करम से जीवन मेरे संवर जाये,
रोग, दु:ख, और पीड़ा सब दूर हो जाये।
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हे बाबा, हे साईं, मेरी तन्हाई मिटा दे,
तेरे चरणों की धूल से, मुझे सौभाग्य बना दे।
तेरे आशीर्वाद से सब कुछ मिल जाये,
तेरे बिना ये हृदय मेरा, अधूरा सा लगे।
दिल की हर तड़प में तेरा नाम गूँजता,
तेरी भक्ति में ही, सारा सुख छुपा।
तेरे चरणों में आकर, मन मेरा शान्त हो जाये,
तेरी कृपा से ही, जीवन मेरा महक जाये।
हे बाबा, हे साईं, मेरी तन्हाई मिटा दे,
तेरे चरणों की धूल से, मुझे सौभाग्य बना दे।
तेरे आशीर्वाद से सब कुछ मिल जाये,
तेरे बिना ये हृदय मेरा, अधूरा सा लगे।
यह एक भक्ति गीत है, जिसमें भक्त अपने ईश्वर से प्रार्थना कर रहा है कि वह उसकी किस्मत में लिख दे कि वह अपने बाबा के चरणों में शीश नवा सके। गीत के बोल इस प्रकार हैं:
ना ऐसी मेरी किस्मत के र्कचीधाम आ सका अपने बाबा के चरणो में शीश नवा सका
मुझे दर्शन दो बाबा, तेरे चरण में सिर रख सकू मुझ पर इतनी करम कर दो, कि कैची धाम आ सकू
इक यही ख्वाहिश है मेरे माालिक अपने जीवन को भव सागर पार करा सकू
ना दौलत की ना हि शोहरत ना ही ये जग चाहिए मेरी रहमत मिले
इस गीत में भक्त अपने ईश्वर से प्रार्थना कर रहा है कि वह उसकी किस्मत में लिख दे कि वह अपने बाबा के चरणों में शीश नवा सके। वह अपने ईश्वर से दर्शन की मांग कर रहा है और अपने जीवन को भव सागर पार करने की कामना कर रहा है।
गीत के बोलों से यह स्पष्ट होता है कि भक्त को दुनिया की कोई भी चीज़ नहीं चाहिए,
वह केवल अपने ईश्वर की रहमत चाहता है। यह गीत भक्ति और समर्पण की भावना को दर्शाता है।गीत की भाषा और शैली बहुत ही सरल और स्पष्ट है, जो भक्ति की गहराई को दर्शाती है।
गीत के बोलों में एक सच्ची और निष्कलंक भावना है,
जो भक्त के दिल की गहराइयों से निकलती है। गीत का संदेश यह है कि
जीवन की सच्ची सफलता और सुख-शांति केवल ईश्वर की रहमत से ही प्राप्त हो सकती है, न कि दुनिया की किसी भी चीज़ से।
